जैसलमेर । मौसम के अचानक बदलने और तापमान में कमी आने की वजह से कई बच्चे उसकी चपेट में आते ही है, जैसलमेर में भी ये वायरल इन्फेक्शन हो रहा है जिसके चलते कई छोटे बच्चों और बुजुर्ग लोग चपेट में आ रहे है जिसके कारण जवाहिर चिकित्सालय में मरिजों की काफी लंबी कतारें देखने में आ रही है । लेकिन दूर दराज के गाँवों से आने वाले मरीजों को प्रधानमंत्री निशुल्क योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा ।
हमारे क्रू सदस्य कान के डॉ.के पास गए तो उन्होंने भी बाहर की दवाईयां ही लिख कर दी जबकि डॉ. बीना किसी भय के जेनरिक दवाईयां न लिख कर बाजार की दवाइया लिख रहे है जिस बात का डॉ.को कोई भय नहीं ।
प्रशासन अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाएगा तो मरीजों तक जेनेरिक दवाईयां पहुंच ही नहीं पाएगी और आम आदमी इस योजना से वंचित होता रहेगा ।
निशुल्क दवा योजना में नहीं है दवाइयां
निशुल्क दवा योजना मात्र दिखावे के लिए बनायीं गयी है । हर आने वाले मरीज को बाहर की दवाईयां लिख कर डॉ. बेख़ौफ़ है जबकि आज हमारी टीम के कुछ क्रू मेम्बरों ने डॉ.से बात की तो उन्होंने जवाब में कहा की दवा स्टॉक में उपलब्ध नहीं है इसलिए बाजार की दवा लिखी है ।हमारे क्रू सदस्य कान के डॉ.के पास गए तो उन्होंने भी बाहर की दवाईयां ही लिख कर दी जबकि डॉ. बीना किसी भय के जेनरिक दवाईयां न लिख कर बाजार की दवाइया लिख रहे है जिस बात का डॉ.को कोई भय नहीं ।
डॉ. ने पूछताछ में कहा
जब हमारी टीम जे क्रू मेंबर ने डॉ. से इस बारे में बात की तो हर डॉ एक दूसरे को बदमाश कहने लगा और कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिला । जबकि सर्दी खासी बुखार जेसी साधारण बीमारी की जेनरिक दवाईयां बहुत आसानी से दवा वितरण केंद्र में उपलब्ध हो जाती है । अब सवाल यह है कि क्यों डॉ.इस तरह का रवैया आम आदमी के साथ करते है ? क्यों उन्हें जेनरिक दवाये लिख कर नहीं देते ?डॉ. और दलालो की मिली भगत !
जवाहिर चिकित्सालय में इन दिनों एक बात और देखने में आई है वो यह कि उपभोक्ता भंडार में काम करने वाले कुछ युवक बाहर खड़े होते है और मरीज का डॉ.के चैम्बर से बाहर निकलने का इंतजार करते है । जैसे ही मरीज बाहर आता है उससे पर्ची ले लेते है और उसको बोलते है ये दवा आपको यहाँ मिलेगी । ऐसी मिली भगत से चल रहा है कई दिनों से हॉस्पिटल का कारोबार । क्यों कि डॉ. को इससे बड़ा मुनाफा जो हो रहा है ।याद है नौजवानों का त्याग
जवाहिर चिकित्सा की व्यवस्था को ले कर एक संस्था ने हॉस्पिटल में चल रही लापरवाहियों को लेकर कई आंदोलन भी किये । उस संस्था का नाम है, 'माँ तुझे सलाम' । इस संस्था ने केंडलमार्च, अनसन, जैसलमेर बंद जैसे आंदोलन मात्र हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को लेकर किये थे । पर आज वो सब त्याग याद आ रहे है । हॉस्पिटल की हालात इतनी बदतर हो गयी है कि मरीजों को देख कर ही दया बरबस ही आ जाती है ।प्रशासन अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाएगा तो मरीजों तक जेनेरिक दवाईयां पहुंच ही नहीं पाएगी और आम आदमी इस योजना से वंचित होता रहेगा ।
एक्सस्क्लुजीव रिपोर्ट नवीन वाधवानी के साथ क्रू मेंबर मुकेश पनिया : मौसम की मार, मरीजों की लगी कतार
Reviewed by wadhwani news
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February 24, 2018
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