Random Posts

Mobile

test

मेजबानों पर भारी पड़ रहे हैं मेहमान सैलानी ?

— घायल मेहमानों को प्रमुखता और मेजबानों को किनारा भी नसीब नहीं

जैसलमेर । जैसलमेर आने वाले सैलानी यहां के निवासियों के लिए मेहमान हैं और स्थानीय नागरिक मेजबान । मेहमानों का ख्याल रखना मेजबानों का धर्म है । लेकिन इस मेहमाननवाजी में मेहमानों के महत्व के आगे यदि शनै:शनै: मेजबानों की कद्र कम होने लगे तो यह उनके लिए नाइंसाफी होगी । जैसलमेर में इन दिनों ऐसा ही माहौल बनता जा रहा है । मेजबानों को किनारे कर मेहमानों को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है । रेलवे स्टेशन पर सैलानियों को परिवहन की सुविधा पहले मिलती है जबकि स्थानीय नागरिकों को मौका बाद में मिलता है । ऐसे ही अवसर चाहे होटलों में ठहरने को हो या खाने के लिए रेस्टोरेंटों का हो, मेहमान सैलानियों को महत्व पहले दिया जाता है । इसका मुख्य कारण यह हो सकता है कि वे सुविधा के लिए ज्यादा धनराशि का भुगतान करने से नहीं हिचकते । लेकिन यह भी सत्य है कि कई जगह लाईन की स्थिति में वे अपने अनुशासन को नहीं तोड़ते और कहते दिखाई देते हैं कि 'आफ्टर यू' । लेकिन कुछ स्थानीय लोग ही उन्हें अत्यधिक महत्व देने के चक्कर में मेजबानी का महत्व भूल जाते हैं ।

इसी तरह बीमारियों और घायल अवस्था में भी स्थानीय मेजबान नागरिकों को महत्व नहीं मिलता । पूरा अस्पताल प्रशासन उनकी खिदमत में दौड़ा चला आता है और उन्हें यथासंभव हर तरीके से मदद को तैयार रहते हैं जबकि स्थानीय नागरिकों की दुर्दशा कई मर्तबा प्रकाश में आ चुकी है कि उन्हें समय पर न तो उपचार मिलता न ही सद्व्यवहार ।

कुत्तों के काटने की घटनाएं हर साल हजार, लेकिन प्रकाश में एक भी नहीं

जिले में कुत्तों के काटने की घटनाएं हर साल हजारों की संख्या में है लेकिन प्रकाश में एक भी नहीं आई । जिले के सरकारी अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में दर्ज आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेजबान कुत्तों से कितने घायल हो रहे हैं लेकिन अखबार के पन्नों उन्हें तव्वजो नहीं मिली है । मेहमान सैलानियों के घायल होने की खबरें प्रमुखता से छप रही है लेकिन स्थानीय पब्लिक के लिए अखबार के पन्नों में कोई जगह नहीं मिलती और जै मिलती है तो किसी कोने में जहां न तो पाठकों की नजर पड़ती है और न ही प्रशासन की ।

घायल मेहमानों को प्रमुखता और मेजबानों को किनारा भी नसीब नहीं

शहर सहित जिले भर में स्थानीय नागरिकों को आवारा पशुओं और कुत्तों ने घायल किया होगा लेकिन इस कदर कभी भी मीडिया में उनको जगह नहीं मिली जिस तरह इन दिनों घायल मेहमान सैलानियों को दी जा रही है । हालांकि यह इर्ष्या का विषय नहीं है लेकिन मेहमान और मेजबान में अंतर साफ दिख रहा है । यहां तक कि आवारा पशुओं और कुत्तों से घायल होने के बाद प्रशासन ने भी वो तत्परता नहीं दिखाई जो इन दिनों देखने को मिल रही है ।

मेजबानों पर भारी पड़ रहे हैं मेहमान सैलानी ? मेजबानों पर भारी पड़ रहे हैं मेहमान सैलानी ? Reviewed by wadhwani news on February 22, 2018 Rating: 5

No comments:

New Ad

Powered by Blogger.