जैसलमेर । अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ द्वारा आज हनुमान चौराहा स्थित हनुमान मंदिर में 'सद्बुद्धि हनुमान आरती' का आयोजन किया गया। अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ पिछले लगभग चार महीनों से अपनी 33 सूत्रीय स्वास्थ्य प्रबंधन को सुधारने की मांगों को मनवाने के लिए संघर्षरत है । जिसकी शुरुआत अगस्त के महीने में सभी जिले के कलेक्टर्स को ज्ञापन देकर शुरू की गई थी और शांतिपूर्ण तरीके से कालीपट्टी बांध कर कार्य किया गया, इसे अगस्त क्रांति का नाम दिया गया था ।
आंदोलन के दौरान 18 सितंबर को एक दिन की सामूहिक अवकाश लिया गया था। उसके बाद समस्त राजस्थान में एक दिवसीय धरना दिया गया। इसी दौरान असहयोग आंदोलन भी चलाया गया था,जिसमें मीटिंग्स, रिपोर्टिंग, और नसबंदी केम्पस का संपूर्ण बहिष्कार किया गया । सभी डॉक्टर्स को काली दीपावली मनानी पड़ी। उसके बावजूद भी सरकार ने डॉक्टर की एक नहीं सुनी इसलिए मजबूरी में उन्हें 6 नवंबर से हड़ताल पर जाने के लिए विवश होना पड़ा। हड़ताल का खात्मा एक लिखित समझौते के साथ 12 नवंबर को हुआ था। लिखित समझौते के बहुत दिन बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक सरकार ने सेवारत चिकित्सकों की मांगों पर अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है।
सरकार जनता को मंत्री महोदय, अधिकारियों और विज्ञापन द्वारा यह बता रही है कि उसने चिकित्सकों की सभी मांगें मान लिया, मगर यह तथ्य के बिल्कुल विपरीत है सरकार ने एक भी ऑर्डर सेवारत चिकित्सकों की मांग के संबंधित अभी तक नहीं जारी किया है। इसके विपरीत सरकार ने द्वेषपूर्वक चिकित्सक संघ के नेताओं के तबादले कर आंदोलन को कुचलने की चेष्ठा की । सरकार के इस रवैए से समस्त चिकित्सक आक्रोशीत है । इसी आक्रोश के तहत नित्य प्रतिदिन चिकित्सक अपने कार्यस्थल को छोड़कर हॉस्पिटल के बाहर टेंट में मरीजों की सेवाएं लगातार कर रहे हैं। मगर फिर भी अभी तक सरकार की कान में जूं तक नहीं रेंगी है।
इसी आक्रोश को जाहिर करने के लिए आज जैसलमेर इकाई द्वारा हनुमान चौराहा स्थित हनुमान मंदिर में सद्बुद्धि हनुमान आरती का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ जैसलमेर के अध्यक्ष डॉ बी के बारूपाल, अनिल माथुर, मनीषां माथुर, रतन डांगी, कैलाश जाखड़, ओमप्रकाश राठौर, मगा राम परिहार ,प्रहलाद राम और भी अन्य चिकित्सक उपस्थित थे ।
संघ के अध्यक्ष डॉक्टर बीके बारुपाल ने बताया सरकार डॉक्टर के आंदोलन को दबाना और कुचलना चाहती है जो कि लोकतंत्र में कतई जायज नहीं है। सरकार जितना दमन करेगी चिकित्सकों में उतना ही आक्रोश बढ़ता जाएगा, जो कि भविष्य में राज्य की जनता को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं और सेवाओं में आने वाली बाधाओं का कारण बन सकता है। जिसके लिए सिद्धांतह सरकार और उसके तुगलकी फरमान जिम्मेदार होंगे।
आंदोलनरत चिकित्सक हनुमान की शरण में, 'सद्बुद्धि हनुमान आरती' का आयोजन किया
Reviewed by wadhwani news
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December 04, 2017
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